नंदीग्राम माहेश्वरी ज्येष्ठ नागरिक संगठन

एक आनंददायी सफर

ज्येष्ठ नागरिकों के प्रती ऐसा वातावरण बनाना जहां वो स्वाभिमान ,गरिमा और आत्मविश्वास के साथ रहे और समाज के प्रगती मे वो अपना योगदान दे इसलिये संगठन के जरिये उनको एक छत के नीचे लाने का प्रयास नंदीग्राम माहेश्वरी ज्येष्ठ नागरिक संगठन के माध्यम से किया गया ! समाज के ज्येष्ठ नागरिक तथा माहेश्वरी जिला सभा के माजी अध्यक्ष द्वारकादास साबू, नारायणलाल कलंत्री, सुरेश भराडिया,डॉ सुरेश दागडिया रमेश सोमानी, बालमुकुंद बलदवा, सीए आनंद काबरा, दुर्गाप्रसाद जाजू, सुभाष सोमाणी, राजेंद्रप्रसाद बलदवा इन्होने आगे बढकर इस संगठन का निर्माण किया और ज्येष्ठ नागरिकोंके लिये एक व्यासपीठ उपलब्ध कराया.

एक दुसरे के साथ समय बिताये,गपशप्प करे,सुख दुःख की बाते करे, कार्यक्रमोंका आयोजन कर उसमे हिस्सा लेके जीवन को आनंदमय बनाये यही संगठन खडा करने मकसद था ! साथ ही ज्येष्ठ नागरिकों के समृध्द अनुभव और ज्ञान का समाज को फायदा हो ऐसा संगठन का प्रयास है ! कूछ महिनेमे ही इस संगठन से बहोत सारे ज्येष्ठ समाजबंधू जुड गये! ज्येष्ठ व्यक्ती के निवासस्थान पर जाकर उनका जन्मदिन तथा विवाह की वर्षगांठ मनाना इस उपक्रम के जरिये उस ज्येष्ठ व्यक्ती के जीवन में आनंद और उत्साह भरने काम माहेश्वरी ज्येष्ठ नागरिक संघठन कर रहा है ! संगठन की वजह से अकेलेपन का एहसास नही होता,निराशा को दूर करने मे मदत होती है ! उनमे संतोष की भावना पैदा होती है !

विवाह के ५० वी सालगिरह का अनोखा उत्सव !

नंदीग्राम माहेश्वरी ज्येष्ठ नागरिक संगठन की ओर से पिछले महिने मे अनेक ज्येष्ठ व्यक्तियोंके विवाह की ५० वी सालगिरह अत्यंत धुमधाम से मनायी गयी ! आशीर्वाद गार्डन मे इसका भव्य आयोजन किया गया था ! बँडबाजे के साथ स्वागत,झालावारना,अक्षदा, मंगलास्टक ये सभी रसमे, फुलो की होली का उत्साह इस प्रसन्न वातावरण मे सभी के विवाह की ५० वी सालगिरह अनोखे तरह से मनायी गयी! इस मौकेपर उनके पारिवारिक सदस्योंने हर कार्यक्रम मे बढ चढकर हिस्सा लिया , समाज के लोगों के लिये ये एक यादगार पल बन गया ! ज्येष्ठ नागरिक संगठनने इस खास प्रसंग को और खास बनाने मे कोई कसर नही छोडी थी !

विशेषतः कूछ व्यक्तियोंने अपने इस खास मौकेपर गाना गाकर अपनी खुशी इजहार की ! एक उत्साह,आनंद उनके चेहरेपर झलक रहा था,जैसे आज ही उनकी शादी है ! उस जमाने मे शादीया किस तरह होती है, रीतिरिवाज कैसे थे,लडका-लडकी एक दुसरे को देखते थे या परिवार के लोग ही निर्णय लेते थे, इन सारे सवालों के जबाब उन्होंने अपने मुलाकात मे दिये और अपने अनुभव सबके सामने रख दिये!